गुरुशिष्यामृत! (ढिंग टांग!)

ब्रिटिश नंदी
शनिवार, 8 जुलै 2017

कैसे कर्ज घ्यावे। आणि बुडवावे।
वर ओरडावे। बेंबीदेठ।।

किंवा शहाजोग। बुडवावी बॅंक।
करोनिया शंख। उलटा दैवें।।

सांगावे जनांना। नाही म्यां त्यातला।
तरी क़डी घाला। दाराला हो।।

मनाचिये गुंती। काळे नि पांढरे।
त्याचे गंडेदोरे। आम्हापास।।

लिंपियले घर। केले चिरेबंदी।
पक्‍की नोटाबंदी। हवाप्रुफ।।

तरीही दावू गा। अशी सांदीफट।
धंदा तो चखोट। चालू ठेवा।।

कैसे कर्ज घ्यावे। आणि बुडवावे।
वर ओरडावे। बेंबीदेठ।।

किंवा शहाजोग। बुडवावी बॅंक।
करोनिया शंख। उलटा दैवें।।

सांगावे जनांना। नाही म्यां त्यातला।
तरी क़डी घाला। दाराला हो।।

ऐसा गा सहकार। करु स्वाहाकार।
न देऊ ढेकर। अजिबात।।

आम्ही गुरुराय। गुरुंचेही गुरु।
दक्षिणा स्वीकारु। ऍडव्हान्स।।

गुरुची पाऊले। गुरुलाच ठावी।
चोराचा इल्लम। चोराला पै।।

शिष्याला पाहून। गुरु जोडी हात।
गुरुशिष्यामृत। योग आला।।

नव्या युगे आम्ही। गंडाबंद गुरु।।
वंदितो आदरु। शिष्यालागीं।।

आम्हा आहे तैसा। दारिद्य्राचा सोस।
होतो अफसोस। काय करु?।।

आमुचा विनय। दिसे दैनिकात।
सजे जाहिरात। पानभर।।

जोडोनिया धन। उत्तम वेव्हारें।
उदास विचारें। द्यावे आम्हां।।

जयांपास नाही। लाखावेरी धन।
त्याने विद्यार्जन। करावे का?।।

कैंचे अवडंबर। चुकवा की कर।
खावे पोटभर। अंगालागी।।

काळ्या-पांढऱ्याचे। काही न विशेष।
इतुका वर्णद्‌वेष। नाही बरा।।

ऐसा गा मी गुरु। सत्तेचा मजूर।
पायाजागीं खूर। आमुच्या बा।।

नंदी म्हणे राया। बदला शिक्षण।
तरी अच्छे दिन। आले आले।।