बापू-गाथा! (ढिंग टांग)

ब्रिटिश नंदी
शनिवार, 28 एप्रिल 2018

काय देवा ऐसे। आले कलियुग।
भाळी नर्कभोग। महात्म्यांच्या।।

ज्याच्या नावामध्ये। समाविष्ट राम।
जिंदगी हराम। त्याची व्हावी?।।

कुणि एक होता। पूज्य आसाराम।
त्याचाही आश्रम। उध्वस्तला।।

पूर्वीचा तो आता । रामही गा नुरे।
कोठडीत झुरे। उकाड्यात।।

ऐसे कैसे झाले। काहीचिया बाही।
उरलीच नाही। लाजकाज।।

जयाच्या मंडपी। होते लाखो भक्‍त।
सजा त्याला सक्‍त। मजुरीची।।

गावोगाव त्याने। स्थापियेले मठ।
तेथे नटखट। क्रीडा चाले।।

सुखे चाऱ्ही ठाव। पंचतारांकित ।
ऐय्याशीची बात। रंगली हो।।

काय देवा ऐसे। आले कलियुग।
भाळी नर्कभोग। महात्म्यांच्या।।

ज्याच्या नावामध्ये। समाविष्ट राम।
जिंदगी हराम। त्याची व्हावी?।।

कुणि एक होता। पूज्य आसाराम।
त्याचाही आश्रम। उध्वस्तला।।

पूर्वीचा तो आता । रामही गा नुरे।
कोठडीत झुरे। उकाड्यात।।

ऐसे कैसे झाले। काहीचिया बाही।
उरलीच नाही। लाजकाज।।

जयाच्या मंडपी। होते लाखो भक्‍त।
सजा त्याला सक्‍त। मजुरीची।।

गावोगाव त्याने। स्थापियेले मठ।
तेथे नटखट। क्रीडा चाले।।

सुखे चाऱ्ही ठाव। पंचतारांकित ।
ऐय्याशीची बात। रंगली हो।।

हुरळल्या मेंढ्या। जाती वेगे वेगें।
लांडग्याच्या मागे। तैसे होई।।

सोपवावा सारा। संसाराचा भार।
बापू तारणहार। आहेतचि।।
 
मंडपात नाचे। अवलिया बापू।
पक्‍का खिसेकापू। ठरला की।।

लाखो लाखो त्याचे। अनुयायी भक्‍त ।
सारे अनुरक्‍त। बापूवरी।।

बापू ऐसे करी। बापू तैसे करी।
जो तो पाय धरी। बापूचे हो।।

बापू नव्हे हा तो। गर्दीचा सम्राट।
जमवितो व्होट। लाखावेरी।।

हेचि ओळखून। टेकवाया माथा।
वाढला राबता। पुढाऱ्यांचा।।

बापू म्हणे भक्‍तां। सर्व आहे माया।
जाणार आहे वाया। प्रलयात।।

उत्तम वेव्हारे। नका जोडूं धन।
द्यावे मज आणून। सत्वरचि।।

कशाला कसता। भिकार जमीन।
करा दान। सत्पात्री की।।

भर्जरी वस्त्रात। बापू नाचे रंगी।
धंदे बहुढंगी। बॅकस्टेज।।

म्हणे मीच आहे। राम आणि श्‍याम।
देवत्वाचे मीच। सॅंडविच।।

सॅंडविच माझे। पवित्र प्रसाद।
नका घालू वाद। अद्‌वैताचा।।

आपुल्या गा मध्ये। नको बा अंतर।
कोवळी ही पोर। तुमचीच का?।।

भोळ्या पोरीसाठी। बापू उल्लू झाला।
आणि कलंडला। शेजारीच।।

अध्यात्मात हल्ली। चालते असेच।
थोडी खेचाखेच। माफ आहे।।

पोर गळाठली। पळाली सत्वर।
गुदरे तक्रार। पोलिसात।।

बदनाम बापू। गेला गजाआड।
झाली चिरफाड। कोरटात।।

ऐसे गा ते ब्रह्म। गेले दैवजात।
बाराच्या भावात। नंदी म्हणे।।

Web Title: editorial dhing tang british nandi article

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