घोटाळ्याचे अभंग! 

सकाळ वृत्तसेवा
शनिवार, 23 डिसेंबर 2017

देवा तुझे देणे। अपार अपार। 
परि मी लाचार। अनभिज्ञ।। 

घोटाळ्यात कैसे। कोणी खादियेले। 
किती खादियेले। नकळे काही।। 

तडागी राखितो। तोचि चाखी पाणी। 
म्हणे चक्रपाणि। गीतेमाजी।। 

चोराच्या उश्‍याला। तिजोरीची किल्ली। 
पुढाऱ्यांस दिल्ली। तैशी आहे।। 

नकळे मज काही। शेंडा नि बुडखा। 
सारा लेखाजोखा। घेऊनही।। 

जाहला जाहला। घोटाळा की जाला। 
चोरीचा मामला। काळाकुट्ट।। 

ह्यांना हो जाहला। कैसा भस्म्या रोग। 
आता भोगा भोग। कर्माचेही।। 

किती खाल लेको। फुटेल ना पोट। 
पोट की ही मोट। पखालचि।। 

देवा तुझे देणे। अपार अपार। 
परि मी लाचार। अनभिज्ञ।। 

घोटाळ्यात कैसे। कोणी खादियेले। 
किती खादियेले। नकळे काही।। 

तडागी राखितो। तोचि चाखी पाणी। 
म्हणे चक्रपाणि। गीतेमाजी।। 

चोराच्या उश्‍याला। तिजोरीची किल्ली। 
पुढाऱ्यांस दिल्ली। तैशी आहे।। 

नकळे मज काही। शेंडा नि बुडखा। 
सारा लेखाजोखा। घेऊनही।। 

जाहला जाहला। घोटाळा की जाला। 
चोरीचा मामला। काळाकुट्ट।। 

ह्यांना हो जाहला। कैसा भस्म्या रोग। 
आता भोगा भोग। कर्माचेही।। 

किती खाल लेको। फुटेल ना पोट। 
पोट की ही मोट। पखालचि।। 

म्हणोनिया नेली । मुखी मूठ पालथी। 
गेले महारथी। गजाआड।। 

ओढिले कोर्टात। धरोनि बखोट। 
सांगा रे चखोट। खरे खरे।। 

आम्ही इनोसंट। नच आम्ही त्यातले। 
दार लावा आतले। म्हणती सारे।। 

उलट सुलट। साक्षी नि पुरावे। 
दावे प्रतिदावे। प्राणांतिक।। 

दातओठ खात। धरिले खादाड। 
फोडिला पहाड। फायलींचा।। 

लाख लाख कोटी। खर्व नि निखर्व। 
आकडेच सर्व। गोलमाल।। 

एवढे करोनी। जीव टांगलेले। 
हाती न लागले। काही काही।। 

पोखरोनी गिरी। निघाला मूषक। 
भिडले चषक। आरोपींचे।। 

एवढे कळले। मज पामराला। 
झाला ना घोटाळा। रत्तिभर।। 

आरोपी निघाले। वाजत गाजत। 
ज्याची झाली जीत। तोचि खरा।। 

हाता करा पुढे। खोबरे नि गूळ।। 
धुतले तांदूळ। आता सारे।। 

घोटाळ्याचे ब्रह्म। एक सत्य टू जी। 
अवधारिजो जी। नंदी म्हणे।। 
 

Web Title: marathi article scam pune editorial

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