ढिंग टांग : बजेटदेवीचे अभंग!

ब्रिटिश नंदी
Saturday, 1 February 2020

माये तुझे किती। वानूं उपकार।
तूचि गे साकार। अर्थविश्‍व।।
अर्थविश्‍व सारे। फिरे तुझ्याभवें।
काय नको हवे। तुजला ठावे।।

माये तुझे किती। वानूं उपकार।
तूचि गे साकार। अर्थविश्‍व।।
अर्थविश्‍व सारे। फिरे तुझ्याभवें।
काय नको हवे। तुजला ठावे।।
पाहतो म्यां वाट। युगे रात्रंदिन।
कधी अच्छे दिन। येतील गे।।
दर साल तुझा। येतो गे उच्छाव।
बजेटचा भाव। वधारतो।।
तुझ्या शब्दालागी। चढ नि उतार।
पूज्य शेअरबाजार। हादरतो।।
माये तुझे किती। विशाल गे मन।
वाट पाही जन। कृपेची गे।।
उगवला माये। बजेटचा दीस।
उन्नीस की बीस। जाणू आतां।।
सोसता सोसेना। संसाराचा भार।
आता तुझ्यावर। सारे आहे।।

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दया करी देवी। नको आता ताप।
लागली गे धाप। कमावितां।।
हिशेब ठिशेब। आवक जावक।
सदा धाकधूक। हृदयामाजी।।
तुझिया ब्यागेत। आमुचा संकल्प।
काही अल्पस्वल्प। शुभलाभ।।
नवी कोरी ब्याग।
नव्हे, जादूपेटी।।
रहस्यांच्या गोठी।
त्यात साऱ्या।।
नवे कोरे कर। काही उपकर। 
सारे वर वर। उपचार ।।
येई तैसा जाई। हरेक रुपय्या।
हाती नुरे नया। पैसा काही।।
जीडीपीचा रेट। तूट नि फिस्कल।
डोकं बा खस्कल। ऐकोनिया।।
आकड्यांच्या रानी।
वाटा, चोरवाटा।
बराचसा घाटा। लाभ थोडा।।
तुझिया कृपेने। जगतो साचार।
नाही ते विचार। नच करी।।
म्या गा दीनबंधु।
जन्म कफल्लक।
ऐसे ब्याडलक। जन्मभरी।।
एक आणि तीस। आम्हा गे समान।
पगार ना मान। मिळे आम्हां।।
महागाई येत्ये।
क्रूर ती राक्षसी।
भक्षिते आम्हांसी। दिनोदिन।।
किती कमविले। थोडे जमविले।
सारे गमाविले। करापोटी।।
कितीदा सोसू म्यां। 
जीएस्टीचा मार। 
खाऊनिया खार। नको ताणूं।।  
दर साल येतो। तुझा माये सण।
डोक्‍यातले घण। वाजतात।।
कुणी म्हणे त्याला। 
संकल्प अर्थाचा।
अर्थ निरर्थाचा। 
कोणी म्हणे।।
ऐक माये माझे। 
एवढेचि करी।।
नको तंबाखूवरी। लावू कर।।
तेवढी मळून। उगा मी राहीन।
निमूट जगीन। आहे तैसा।।


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