प्लास्टिकचे अभंग! (ढिंग टांग!)

सकाळ वृत्तसेवा
सोमवार, 25 जून 2018

प्रभात प्रहरी। दारापास हवी। 
दुधाची पिशवी। प्लास्टिकाची।। 

चहाचें पश्‍चात। होते घालमेल। 
हाती टमरेल। प्लास्टिकाचे।। 

आम्हा घरी धन। प्लास्टिकाची रतने। 
आणिक बर्तने। प्लास्टिकाची।। 

प्लास्टिकाच्या मिषें। आमुचे जीवन। 
सुफळ संप्रुण। झाले झाले।। 

प्लास्टिकाचे हास्य। प्लास्टिक वदने। 
सुहास्य रदने। प्लास्टिकाची।। 

घासावया दांत। प्लास्टिकाचा ब्रश। 
आम्ही हो विवश। प्लास्टिकाचे।। 

प्रभात प्रहरी। दारापास हवी। 
दुधाची पिशवी। प्लास्टिकाची।। 

चहाचें पश्‍चात। होते घालमेल। 
हाती टमरेल। प्लास्टिकाचे।। 

प्लास्टिकाच्या रंगी। रंगुनिया गेलो। 
बुडोनिया गेलो। बादलीत।। 

प्लास्टिकाची येथे। कैक आवरणें। 
सुसह्य हे जिणे। त्याच्या योगें।। 

आधारकार्डाचा। पिशवी आधार। 
वाटरप्रूफ फार। आहे तैसी।। 

करावे जतन। फोटो आलबम। 
रोकडी रक्‍कम। प्लास्टिकात। 

प्लास्टिकात आहे। शाश्‍वताची हमी। 
बाहेरची नमी। बाहेरची।। 

जोडोनिया धन। उत्तम वेव्हारे। 
जपून ठेवा रे। प्लास्टिकात।। 

प्लास्टिकी राहती । नोटांची चुरगळ। 
चिठ्ठ्या वायफळ। युगेयुगे।। 

आमुच्या खिश्‍यात। असते सदैव। 
पिशवी सर्वथैव। प्लास्टिकाची।। 

ऐतवारी गांठू । कोळणीचा पाटा। 
कोळंबीचा वाटा। त्याच्या वरी।। 

करुनि घासाघीस। केलाचि बाजार। 
भरिला साचार। पिशवीत।। 

मासोळी। टाळोनिया आम्हां। 
घ्यावा लागे खिमा। कधी कधी।। 

मुर्गी वा मटण। मासे वा वाटण। 
साऱ्याची धारण। पिशवीत।। 

करोनि बाजार। काढिली पिशवी। 
तेवढ्यात शिवी। कानी येई।। 

अरे नतद्रष्टा । मूर्ख मतिमंद। 
प्लास्टिक आहे बंद। ठाव नाही?।। 

एवढे बोलोनि। त्याने पावती बुक। 
काढिले अचूक। टाकोटाक।। 

काय सांगू देवा। नशिबाचा गंड। 
पाचसहस्त्र दंड । भरिला म्यां।। 

पिशवीचा मोह। पडिला महाग। 
आली मज जाग। तेव्हा देवा।। 

ऐसा पिशवीचा। महिमा अगाध। 
तरी झाली बाद। देवा देवा।। 

प्लास्टिक पिशवी। मूर्तिमंत आत्मा। 
करील बा खात्मा। एखाद्याचा। 

जैसा आत्मा आहे। जगीं चिरंतन। 
तैसे अधिष्ठान। प्लास्टिकाला।। 

भौतिकाचा देह । मिळे मातीमाजी। 
आत्म्यालागीं तेही। लागू नाही।। 

तैसे प्लास्टिकाच्या। थैलीचे प्राक्‍तन। 
त्याला ना मरण। तिन्ही लोकीं।। 

नंदी म्हणे आता। त्यागावे प्लास्टिक। 
नको ती मिष्टिक। पुन्हा पुन्हा।। 

-ब्रिटिश नंदी

Web Title: Pune Edition Editorial dhing tang Plastic Abhang