ढिंग टांग : काक महिम्न!

ब्रिटिश नंदी
शनिवार, 28 सप्टेंबर 2019

काय वानू कागा। तुझे कवतिक।
तू गा अमोलिक। पक्षीराज।

बुद्धीचे चापल्य। आणि चतुराई।
गुण तुझ्या ठाई। छत्तीस की।।

पक्षिणीचा सुस्वरु। नाही तुझ्या गळा।
रंग तुझा काळा। कुळकुळीत।।

जटायुचा धर्म। गरुडाची झेप।
यांच्या स्टोऱ्या खूप। तुझ्या नाही।।

गरुड उड्डाणे। जाहाले शहाणे।
कावळ्याने म्हणे। उडू नये?।।

तुझ्या शापानेही। न मरे की बैल।
तुझी वाणी सैल। सुटी सुटी।।

रंगीत पिसांचा। नसे रंगभार।
इमेज बेकार। तशी तुझी।।

तुला नाही कागा। वेधक पिसारा।
उघडाच सारा। कारभार।।

काय वानू कागा। तुझे कवतिक।
तू गा अमोलिक। पक्षीराज।

बुद्धीचे चापल्य। आणि चतुराई।
गुण तुझ्या ठाई। छत्तीस की।।

पक्षिणीचा सुस्वरु। नाही तुझ्या गळा।
रंग तुझा काळा। कुळकुळीत।।

जटायुचा धर्म। गरुडाची झेप।
यांच्या स्टोऱ्या खूप। तुझ्या नाही।।

गरुड उड्डाणे। जाहाले शहाणे।
कावळ्याने म्हणे। उडू नये?।।

तुझ्या शापानेही। न मरे की बैल।
तुझी वाणी सैल। सुटी सुटी।।

रंगीत पिसांचा। नसे रंगभार।
इमेज बेकार। तशी तुझी।।

तुला नाही कागा। वेधक पिसारा।
उघडाच सारा। कारभार।।

पक्षीराज कागा। तुझा स्वाभिमानी बाणा।
एक डोळा काणा। असूनही।।

कधी नाही तुझे। खाण्याचे गा वांदे।
बाकीचे परिंदे। पोटावळे।।

पिंपळवृक्षावरी। भरे तुझी शाळा।
युनिफॉर्म काळा। विद्यार्थ्यांसी।।

कोणी काही म्हणो। तूच रे सज्जन।
खरा जंटलमन। बर्ड तूचि।।

कोकिळेची अंडी। उबविसी घरा।
भरविसी चारा। तिच्या पिल्लां।।

हल्लीच्या दिसात। ऐसी भूतदया।
परोपकार, माया। कोण दावी?।।
 

अडलेल्या आत्म्या। मोक्ष देसी खगा।
सोयरा नि सगा। मुमुक्षूंचा।।

तुझ्या चोचस्पर्शे। आत्मे सुधरती।
रस्ते गुजरती। स्वर्गवाटे।।

तुझिया चोचीने। जेविती पितरे।
समाधान होते रे। तुझ्यामुळे।।

स्वर्गस्थ पितर। म्हणती ‘उतर’।
अन्यथा इतर। पिंड नेती।।

पितृ पंध्रवडा। आणि इलेक्‍शन।
दोहोंचे तुळण। केलेस का?।।

आमुचे गा व्होट। आणि तुझी चोच।
ज्याला मिळे तोच। पुण्यश्‍लोक।।

सारांश एवढा। सांगतो म्या कागा।
कावळ्याचा सगा। मतदार।।
 


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Web Title: dhing tang article