संकल्पपत्र के बाद! (ढिंग टांग)

ब्रिटिश नंदी
मंगळवार, 9 एप्रिल 2019

मोटाभाई     :     जे श्री क्रष्ण!...(ग्रंथाची प्रत सादर अर्पण करत) आ आपडा संकल्पपत्र तमारे चरणमां समर्पित!!
नमोजीभाई     :     जे श्री क्रष्ण...शाब्बाश मेरे मित्र! बहु सरस काम किधा!!
मोटाभाई     :     (नम्रपणे) थेंक्‍यू! आप तो हमारे सबकुछ है! आप है इसलिए तो ये सब है!
नमोजीभाई     :     (खुशीत) हम है तो सब मुमकीन है! पण मेनिफेस्टो एकदम कडक बनाव्या तमने! एटलामाटे हूं तमे एक प्लेट ढोकळा खिलाविश!!
मोटाभाई     :     (नम्रपणे) बस, एक कप चाय आपो!

मोटाभाई     :     जे श्री क्रष्ण!...(ग्रंथाची प्रत सादर अर्पण करत) आ आपडा संकल्पपत्र तमारे चरणमां समर्पित!!
नमोजीभाई     :     जे श्री क्रष्ण...शाब्बाश मेरे मित्र! बहु सरस काम किधा!!
मोटाभाई     :     (नम्रपणे) थेंक्‍यू! आप तो हमारे सबकुछ है! आप है इसलिए तो ये सब है!
नमोजीभाई     :     (खुशीत) हम है तो सब मुमकीन है! पण मेनिफेस्टो एकदम कडक बनाव्या तमने! एटलामाटे हूं तमे एक प्लेट ढोकळा खिलाविश!!
मोटाभाई     :     (नम्रपणे) बस, एक कप चाय आपो!
नमोजीभाई     : किती मस्त झ्याला आपला मेनिफेस्टो! व्वाहव्वा!! संकल्पित भारत, सशक्‍त भारत! मेनिफेस्टोचा पन्नाप्रमुख कोण हता?
मोटाभाई     : (घाईघाईने) पन्नाप्रमुख चूंटणी केंद्रावर असते!
नमोजीभाई     : (विषय बदलत) सब ठीक छे ने! केटला प्रोमिस छे?
मोटाभाई     : (तपशील देत) अडताळीस पन्नामां पिच्चत्तर प्रोमिस छे!
नमोजीभाई     : (आवाज बारीक करत) पंधरा लाख वाळी वात तो नथी ने?
मोटाभाई     : ना! एमा डिफरंट छे!!माने पब्लिशर? हूंच!!
नमोजीभाई     : फस्क्‍लास!! आपल्या मेनिफेस्टोसमोर कोंग्रेसवाल्यांचा मेनिफेस्टो कुछ भी नही!! एना मेनिफेस्टो तो हवे रद्दी मां जाईश!!
मोटाभाई     : (खुशीत भर घालत) आ मेनिफेस्टो नथी! नये भारत ना संकल्पपत्र छे!! कोंग्रेसनी न्याय योजना तो एकदम बोगस गमे छे! आपडा रोडमेप एकदम सरस छे! किसनाभाई खुश, उद्यमीभाई खुश, नोकर पण खुश...बध्दा लोग आता आपल्यालाच व्होट देणार!
नमोजीभाई    : (हाय फाइव्ह देत) अब की बार त्रणसो पार!!
मोटाभाई     : मने तो लागे के चारसो तलक सीट मळशे!
नमोजीभाई     : (रिलॅक्‍स होत) किती मस्त योजना, किती मस्त प्रोमिस! हे सगळं तुम्हाला कसा सूझते?
मोटाभाई     : (नम्रपणे) आपकी आशीर्वादसे!!
नमोजीभाई     : आ तो सव्वासो करोड जनता ना प्रेम छे! जनता प्रेम करते, म्हणून मी च्यांगला काम करते!! पांच साल मां बहु काम थई गया...
मोटाभाई     : गेल्या सत्तर वरसमां झ्याला नाय, तेच्या दुगुना काम गेल्या पांच वरसमां झ्याला! तरी पण आ लोग गाळी आपे छे! हवे शुं करवानुं?
नमोजीभाई : एटला च्यांगला दिवस! मूंह गिराकर क्‍यूं बैठे हो?
मोटाभाई     : विचार करु छुं!
नमोजीभाई     : ओह! आ तो बहु कठीन काम छे! कसला विचार करता आहात मोटाभाई!! आता फक्‍त तमे सीटें गिनो! संकल्पपत्र झ्याला! केंम्पेन पण शुरु झ्याला!! फिकर नॉट!!
मोटाभाई     : चूंटणीनी फिकर नथी! ते तर आपण आरामथी जिंकणार!! पण...
नमोजीभाई     : तो पछी शूं टेन्शन छे? बतावो तो!!
मोटाभाई     : (चिंताग्रस्त सुरात) संकल्पपत्र लोकांना आवडला तर काहीच प्रोब्लेम नथी! पण हूं काले आपडे गुरु अडवानीजी अने मुरली मनोहर जोशीजीने मळ्या!
नमोजीभाई : (सावध होत) शूं कह्यू एने? आता काही ब्लोग वगैराह लिहू नका, असा सांगितला ने त्यांना?
मोटाभाई : (दिलासा देत) सांगितला!! पण अडवानीजी म्हणत होते, की ‘‘संकल्पपत्र वगैरह सब ठीकही है, लेकिन चूंटणीनंतर काही उल्टासुल्टा झ्याला तर अमदावादमध्ये दुकानाच्या एक गाळा घेऊन ठेवा! आपसे पकोडे खरीदना भी तो किसी का संकल्प हो सकता है!!’’

Web Title: editorial dhing tang british nandi article