ढिंग टांग : कोरड्या पाषाणाचे अभंग!

ब्रिटिश नंदी
शनिवार, 13 जुलै 2019

वैकुंठीच्या राण्या। मागणे वांकुडे। 
वेडे नि बागडे। मागतो आहे।। 

एवढेच करी। तेचि गा रगड। 
मजजेवी दगड। जागे करी।।

मी गा हा ऐसा। कोरडा पाषाण। 
दुर्गुणांची खाण। मूर्तिमंत।। 

मी गा सराईत। अट्टल नास्तिक। 
कपाळी स्वस्तिक। उलटेचि।। 

कधी ना घेतले। तुझे मुखी नाव। 
भौतिकाची हाव। जन्मभरी।। 

कधी ना ढुंकलो। देवाचिया द्वारी। 
रिकाम्या गाभारी। वांकलो ना।। 

कधी न जोडिले। ऐसे दोन्ही कर। 
केला नमस्कार। कोणालाही।। 

अहंतेचेचा ज्वर । सदा राही चढा। 
स्वार्थाचाच पाढा। घोटला म्या।। 

नाही म्या वांचिली। कधी ज्ञानेशोरी। 
केली नाही वारी। आयुष्यात।। 

व्यर्थ नामदेव। फुका गेला तुका। 
संतांच्या गा हाका। वाया गेल्या।। 

अमृताच्या धारा। वोतिल्या उपरी। 
पालथ्या घड्यावरी। वाहो गेले।। 

कोण पुसे काय। विश्‍व ते केवढे। 
मस्तकाएवढे। उत्तरलो।। 

जन्माची बुभुक्षा। हीच माझी शिक्षा। 
सदोदित भिक्षा। वासनेची।। 

सेंबुडात माशी। लोळे गडाबडा। 
तैसा राडारोडा। आयुष्याचा।। 

सदोदित केली। नस्ती उठाठेव। 
मग कैसा देव। भेटावा गा?।। 

खळगी दोन वीत। खाते गाडाभर। 
हे तो कृष्णविवर। सर्वभक्षी।। 

मनाचिये गुंती । विकारांचे सर्प। 
विकृताचे दर्प। उसळती।। 

काय दैव माझे। कळेना की काही। 
काहीचिया बाही। झाले आज।। 

पहाट प्रहरी। ऐकू आला कानी। 
स्वर तो दुरुनी। मृदंगाचा।। 

अस्पष्ट वाजतो। टाळ घुळघुळा। 
अश्रू खळाखळा । वाहियले।। 

काय मज पापया। विठो पालवितो। 
तेथे बोलावितो । प्रेमभरे?।। 

उडो उडो गेले। मन हे साचार। 
मेघांवरी स्वार। निघाले की।। 

जाता पंढरीसी। भरोनिया पावें। 
मन ऐसे धावे। त्याचे पायी।। 

किती पायपीट। किती येरझार। 
सारा परिहार। येथे झाला।। 

दुरुनचि दिसें। कैवल्य कळस। 
मनाची तुळस। बहरली।। 

वैकुंठीच्या राण्या। मागणे वांकुडे। 
वेडे नि बागडे। मागतो आहे।। 

एवढेच करी। तेचि गा रगड। 
मजजेवी दगड। जागे करी।।


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Web Title: Political Satire in Marathi Dhing Tang