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Dhing Tang

ढिंग टांग : डोकेफोडीचे अभंग!

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-ब्रिटिश नंदी

हाय हाय देवा। कैसे दिस आले।

उफराटे झाले। खरेखोटे।।

जितेपणी देवा। रौरवाचा भास।

नरकाचा वास। तळातचि।।

उलटे सुलट। सुलटे उलट।

आतले बाहेर। ऐसे झाले।।

सत्य नि असत्य। गोड नि वंगाळ।

माती नि ढेकाळ। एक झाले।।

थकिस्तचि झाले। येथ निवडणारे।

काळे आणि गोरे। उडदामाजी।।

अस्सलाची होते। जेधवा नक्कल।

नक्कलची अस्सल। होते तेव्हा।।

प्रिथिमीचे काय। अक्ष उलटले।

आभाळचि आले। पायाखाली।।

बेगडाला आला। कांचनाचा भाव।

बदकाचे नाव। हंस झाले।।

सुसरी झाली पाल। हत्ती हो मूषक।

शेळी नरभक्षक। दाढा रगडी।।

व्याघ्र करी म्यांव। सिंहाचा बसे घसा।

भाई झाला ससा। जंगलात।।

कोल्ह्याचे फावले। म्हणे मीच राजा।

वाजवीन बाजा। तुमचा हो।।

काडीकुस्तीगीर। थोपटतो दंड।

फोफशांचे बंड। माजले हो।।

कुणी नामदार। ऐसा बोलभांड।

दिसे आडदांड। बोलण्यात।।

काय देवा ऐट। भाषेचा लहेजा।

शब्दामागे मोजा। शिव्याशाप।।

चपला मारीन। लाथा मी झाडीन।

देऊन ठेवीन। कानसुली।।

याने उध्दरावी। दुज्याचीच माय।

त्याने मग आय। काढावी की।।

लोकसेवेसाठी। सारे हे चालले।

सुक्यासह ओले। जळते ना।।

येकमेका धरु। काढू उणीदुणी।

बडवितो धुणी। चौकामाजी।।

नाही लाजकाज। जिभेला ना हाड।

बोलू फाडफाड। अद्वातद्वा।।

भ्रमाचें जंजाळी। जीव गुरफटे।

भयें सटपटे। कोळिष्टकी।।

काय खरे मानूं। काय आहे खोटे।

मन बारा वाटे। धावे देवा।।

शिवी झाली ओवी। लाखोलीचे श्लोक।

गावे बिनधोक। चौकामध्ये।।

उध्दरावी माय। काढावा तो बाप।

त्यात नाही पाप। काही आता।।

नंदी म्हणे हेचि। खेळ पोलिटिकल।

ध्यावे न्यू नॉर्मल। नव्या युगीं।।

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