मोजुनी माराव्या पैजारा! (ढिंग टांग)

ब्रिटिश नंदी
शनिवार, 25 मार्च 2017

भले तरी देऊ। तुम्हां पाठबळ।
नाठाळाच्या वळ । पाठीमागे।।

नेदी लागो नादी। आम्ही गा मावळे।
गळ्यातचि गळे। घालो नका।।

मऱ्हाटी मातीची। आम्हीच की शान।
देखा तानबान। डोळाडोळीं।।

केली दिल्लीवारी। सकाळच्या पारी।
हवाई सुंदरी। गोड हांसे।।

पुण्याच्या पत्तनी। केले म्या बोर्डिंग।
थोडे डांगडिंग। केले तेथ।।
तेवढ्यात आले। आम्हां न्यावयास।
विमान हे खास। गरुडाजेवी।।

विमानाचे आत। बैसोनिया छान।
घ्यावे खानपान। ऐसे स्वप्न।।

परंतु, हे काय। ऐसे काय झाले।
दैवाने दिधले। कर्में न्यावे?।।

भले तरी देऊ। तुम्हां पाठबळ।
नाठाळाच्या वळ । पाठीमागे।।

नेदी लागो नादी। आम्ही गा मावळे।
गळ्यातचि गळे। घालो नका।।

मऱ्हाटी मातीची। आम्हीच की शान।
देखा तानबान। डोळाडोळीं।।

केली दिल्लीवारी। सकाळच्या पारी।
हवाई सुंदरी। गोड हांसे।।

पुण्याच्या पत्तनी। केले म्या बोर्डिंग।
थोडे डांगडिंग। केले तेथ।।
तेवढ्यात आले। आम्हां न्यावयास।
विमान हे खास। गरुडाजेवी।।

विमानाचे आत। बैसोनिया छान।
घ्यावे खानपान। ऐसे स्वप्न।।

परंतु, हे काय। ऐसे काय झाले।
दैवाने दिधले। कर्में न्यावे?।।

कैंचे ते विमान। उडते भंगार।
भाड्याचे खंगार। दळभद्र।।

नाही खानपान। नाही गा टावेल।
सारे दावे फोल। सोयीधायी।।
सुंदरी तेथील। फुका गोड हासे।
म्हणे तुम्ही खासे। मेहमान।।

म्हणे मज राव। करा ॲडजस।
बिझनेस क्‍लास। येथे नाही।।

म्हटले तयास। बोलू नका फार।
आहे खासदार। मीही एक।।

झटक्‍यात आणा। तक्रारीचे बुक।
लावु नका थुक। मजला ऐसी।।

झाली बाचाबाची। थोडी हातापायी।
काईचिया बाई। घडले गा।।
विमान कंपनीचा। येक कर्मचारी।
करी हमरीतुमरी। बेलाशक।।

दिल्ली आली सर। उतरावे सत्वर।
झोळणा नाहीतर। करु तुम्हां।।

ऐसेनि वदता। खवळले पित्त।
चिघळले चित्त। अंतर्बाह्य।।

मराठी माणूस। चिडला की चिडे।
न देखे मागेपुढे। मग मात्र।।

बचेंगे तो भाई। और भी लडेंगे।
जोरसे हाणेंगे। तुमकू भी हम।।
तैसेचि गा आता। दिल्लीवेशीवर।
दाविली म्या थोर। मर्दुमकी।।

काढोनी सत्वर। कोरे पायताण।
केली मारहाण। त्यासी देवा।।

मोजुनी मारिल्या। त्यासी पंचवीस।
डोईचेनि केस। सडकिले।।

इतुके करोनी। मीच अपराधी।
मीडिया उपाधी। चप्पलमार?।।

मलाचि दाविती। तुकोबाचा नारा।
म्हणे ऐश्‍या नरा। पैजाराचि।।