जीएसटी गाथा! (ढिंग टांग!)

ब्रिटिश नंदी
शनिवार, 1 जुलै 2017

रिटर्न चार्ज मेकॅनिझम। इनकम क्रेडिट।
नसती खिटखिट। झाली देवा।।

करीन मी देवा। निर्जळी उपास।
जीएस्टीचा तास। घ्यावा माझा।।

लढलो अटितटी। केली झटापटी।
तेव्हा जीएसटी। ठांके उभा।।

काय सांगू देवा। घरचे होई थोडे।
व्याही धाडी घोडे। तेवढ्यात।।

काय मायबापा। पाहसी परीक्षा।
काय भिक्षा। दारोदार?।।

प्रारंभी म्हणीजे। आले अच्छे दिन।
मस्तकचि भिन्न। झाले आता।।

नाठाळांचे माथा। हाणायास काठी।
कासेंची लंगोटी। कसोनिया ।।

म्हटले मनाशी। पेटो द्या की रण।
दावू अवलक्षण। "हाता'लागी।।

म्हणोनि मस्तकी। धरिले कमळ।
सांडिला कवळ। मुखातला।।

प्रंतु झाला व्याप। आधी केले तुका।
मग झाले माका। ऐसे झाले।।

धरिले चावतें। सोडिलें पळते।
मारिले मारते। जिवानिशी।।

काहीचिया बाही। झाले लवलाही।
मन केले ग्वाही। अदृष्टाला।।

आसुडाच्या पायीं। प्रगतीचा बैल।
पळे मैलोमैल। वेगें वेगें।।

काय आम्ही खावे। काय आम्ही प्यावे।
काय आम्ही ल्यावे। अंगभर।।

संस्कृती रक्षण। हाचि खरा धर्म।
स्वयें आले वर्म। बोटावरी।।

एक भक्‍त लागे। गोमातेच्या मागे।
त्याच्या आगेमागे। तलवारी।।

दुजा ओढतो गा। कानाखाली त्याच्या।
कवेमध्ये ज्याच्या। प्रेमपात्र।।

गावोगावी झाल्या। हैराणचि लैला।
मजनूच्या गालां। पाच बोटे।।

उघडोनि आता। लावोनिया मन।
खाते जनधन। पाहीं वाट।।

तेवढ्यात आली। आली नोटाबंदी।
सारी चाराचंदी। गटारात।।

दातावरी माराया। नाही पैका टका।
तरीही तो सुका। दम मिळे।।

घेतली उसंत। बैसलो की साचा।
कुर्वाळत टाचा। निरंतर।।

तेवढ्यात आला। वस्तू-सेवा कर।
नवी मरमर। माथ्यावरी।

देवा तुझे बरे। कर कटीवरी।
आम्ही माथ्यावरी। हापटतो।।

म्यां गा हा बापुडा। बालक अजाण।
देवाण घेवाण। नाकळे बा।।

रिटर्न चार्ज मेकॅनिझम। इनकम क्रेडिट।
नसती खिटखिट। झाली देवा।।

करीन मी देवा। निर्जळी उपास।
जीएस्टीचा तास। घ्यावा माझा।।

अगा पांडुरंगा। करितो गे धावा।
थोडका विसावा। द्यावा आम्हा।।

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