मन पांडुरंग... (ढिंग टांग!)

British Nandi
बुधवार, 10 ऑगस्ट 2016

जाता पंढरीसी। सुख वाटे जीवा। 

मिथ्या भवार्णवा। दमलो होतो।। 

 

दोन कवळांसाठी। किती यातायात। 

वीत दीड वीत। पोटासाठी।। 

 

जल्मता जल्मता। चालू पायपीट। 

तुझ्या पायीं वीट। निरंतर।। 

 

जळो ते शिवार। जगणे भिकार। 

नको येरझार। दयार्णवा।। 

 

सोसता सोसेना । संसाराचा ताप। 

लागलीया धाप। धावूं धावूं।। 

 

राजाने झोडिले। आभाळें फोडिलें। 

नशिबें खोडिलें। काय करू?।। 

 

जीवनाच्या मिषें। ऐसी आपाधाप। 

त्याचे मोजमाप। कसे करू?।। 

 

एक धागा सुखी। शंभर दु:खाचे। 

जाता पंढरीसी। सुख वाटे जीवा। 

मिथ्या भवार्णवा। दमलो होतो।। 

 

दोन कवळांसाठी। किती यातायात। 

वीत दीड वीत। पोटासाठी।। 

 

जल्मता जल्मता। चालू पायपीट। 

तुझ्या पायीं वीट। निरंतर।। 

 

जळो ते शिवार। जगणे भिकार। 

नको येरझार। दयार्णवा।। 

 

सोसता सोसेना । संसाराचा ताप। 

लागलीया धाप। धावूं धावूं।। 

 

राजाने झोडिले। आभाळें फोडिलें। 

नशिबें खोडिलें। काय करू?।। 

 

जीवनाच्या मिषें। ऐसी आपाधाप। 

त्याचे मोजमाप। कसे करू?।। 

 

एक धागा सुखी। शंभर दु:खाचे। 

म्हणे आयुष्याचे। वस्त्र ऐसे।। 

 

आमुच्या वस्त्राला। आक्रोशाची वीण। 

धावदोरा क्षीण। दु:खाचाचि।। 

 

ऐसा कैसा देवा। तूचि विणकर। 

एका जरतार। दुज्या नाही?।। 

 

एकु अंगरखा। दिसे भरजरी। 

दुजा दिगंतरी। फाटलेला।। 

 

अरे विणकरा। तुला नाही स्किल। 

तरी देसी बिल। शिलाईचे?।। 

 

जोडोनि ठिगळ। उत्तम वेव्हारें। 

आम्हीच देव्हारे। माजविले।। 

 

ऐसे गा जीवन। दु:खाळूंचा कंद। 

त्यात मतिमंद। बापुडा गा।। 

काय कमी केले। तुझे आम्ही देवा। 

म्हणोनि हा ठेवा। दु:खितांचा?।। 

अखेरी उठलो। उचलले टाळ। 

तोडिली गा नाळ। सौंसाराची।। 

सोने आणि माती। सम तुझ्या खाती। 

ऐसा धनपती। देव माझा।। 

त्रैलोक्‍याचा स्वामी। ब्रह्मांडाचा ठाव। 

तुला नाही हाव। नैवेद्याची।। 

माझेही तैसेच। झाले आहे खास। 

नुरे मोहपाश। कसलाही।। 

निष्कांचन। मृत्तिकेसमान। 

नुरे देहभान। कसलेही।। 

म्हणोनी केशवा। आलो तुझ्यापाई। 

तूच आता नाई। म्हणू नको।। 

दूर दिसो लागे। राऊळीची आभा। 

मनी चंद्रभागा। वाहो लागे।। 

मन पांडुरंग। तन पांडुरंग। 

जन पांडुरंग। रंगले आहे...

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