कमळेचे अभंग! (ढिंग टांग)

ब्रिटिश नंदी
शनिवार, 9 जून 2018

ज्याचेसाठी केला। होता अट्टहास।
जीव कासावीस। झाला होता।।

तेचि सारे आता। येतसे फळाला।
लागती गळाला। काही मासे।।

अच्छे दिनांसाठी। छेडियले युद्ध।
आम्ही वचनबद्ध। जनतेशी।।

गचांडीवरला। हटविला ‘हात’।
आणि मन की बात। साध्य केली।।

मतदारबंधो। आम्ही आहो छान।
आणू अच्छे दिन। विनवितो।।

ऐसेचि सांगोनी। ध्येय साध्य केले।
गंगेमाजी न्हाले। घोडे माझे।।

प्रजाजनांसाठी। काय नाही केले।
किती सालेपाले। लावियले।।

हेही आमुचेच। आमुचेच तेही।
तोचि महात्माही। आमुचाच।।

ज्याचेसाठी केला। होता अट्टहास।
जीव कासावीस। झाला होता।।

तेचि सारे आता। येतसे फळाला।
लागती गळाला। काही मासे।।

अच्छे दिनांसाठी। छेडियले युद्ध।
आम्ही वचनबद्ध। जनतेशी।।

गचांडीवरला। हटविला ‘हात’।
आणि मन की बात। साध्य केली।।

मतदारबंधो। आम्ही आहो छान।
आणू अच्छे दिन। विनवितो।।

ऐसेचि सांगोनी। ध्येय साध्य केले।
गंगेमाजी न्हाले। घोडे माझे।।

प्रजाजनांसाठी। काय नाही केले।
किती सालेपाले। लावियले।।

हेही आमुचेच। आमुचेच तेही।
तोचि महात्माही। आमुचाच।।

एकमेकांसंगे। तरु भवार्णव।
करु यंवत्यंव। प्रगतीपंथे।।

विकासाची गंगा। आणियली दारी।
तेणे मुक्‍ती चारी। भेटियेल्या।।

रुंदारुंद रस्ते। वेगाला उधाण।
पुलांचे उड्डाण। त्याच्या वरी।।

बुलेटच्या वेगें। धावणारी ट्रेन।
बहु लेनदेन। समृद्धीची।।

बांधियले दारी। आणि घरोघरी।
मुक्‍त हागणदारी। देश केला।।

केला साफसूफ। चंड काळा पैका।
बॅंकेमाजी रांका। लागल्या हो।।

खिश्‍यामध्ये आता। ठेवू नका क्‍याश।
त्याने सर्वनाश। ओढवेल।।

थोडी कळ सोसा। गिऱ्हाण सुटेल।
पेट्रोल डिझेल। स्वस्त व्हावे।।

इतके करुन। लोकांचियासाठी।
कशापायी काठी। उगारता?।।

तैशी आम्हा नाही। होत धाकधूक।
पोटनिवडणूक। जड जाते।।

रोड शो आमुचा। वाहनांचे ताफे।
तरी उडे फेफे। मोजणीला।।

मेळविला जय। आम्ही जेमतेम।
संगे इव्हीएम। असूनही।।

भल्या माणसाची। कशास पाहसी।
परीक्षा रे ऐसी। जनार्दना।।

आमुची नियत। आहे साफसाफ।
सारे काही माफ। करु आम्ही।

विकासाच्या मिषें। कमळाला व्होट।
द्यावे गा चखोट। हीच भाक।।

होवोनि भाविक । शिर्डीला गा जाई।
गल्लीतला भाई। तैसे आम्ही।।

मनी असे होते। पटवावे ‘त्यांसी’।
मंत्र चापलुसी। शिंपडला।।

श्रृगालाचे गृहीं। व्याघ्रें बोलाविलें।
राष्ट्र हित भलें। कोण जाणे।।

सारे काही आहे। इलेक्‍शन रंगी।
बाकी रंगारंगी। नाटकेच।।

कमळा म्हणते। जनताजनार्दना।
सोड पुन्हा पान्हा। एकदाच।।

Web Title: editorial dhing tang british nandi article