मी लाभार्थी! (काही अपारंपरिक ओव्या..) (ढिंग टांग)

ब्रिटिश नंदी 
मंगळवार, 14 नोव्हेंबर 2017

शेजीबाई शेजीबाई 
तूच स्वच्छतेची दूत 
कधी सांग उतरावे 
अच्छे दिनांचे हे भूत 

(चाल : तिरकी!) 

शेजीबाई शेजीबाई 
काय सांगू मी कहाणी 
सुखाला ना येथे पार, 
आनंदाने गाते गाणी 

माझिया गे महाराष्ट्री 
जलयुक्‍त ही शिवारे 
शेताशेतामधुनि फिरते 
आनंदाचे गार वारे 

माझिया गे महाराष्ट्री 
सुखी झाला शेतकरी 
धूरमुक्‍त चुलीवर 
माय थापते भाकरी 

माझिया गे महाराष्ट्री 
गाजू लागे कर्जमाफी 
होऊ दे गं खर्च बाई 
ही घे तुला एक टॉफी! 

माझिया गे महाराष्ट्री 
उद्योजक तळपती 
आले आले अच्छे दिन 
गेली गेली पनवती! 

माझिया गे महाराष्ट्री 
जीएसटीचा गे उ:शाप 
उधारीला मारा गोळी 
वापरा की भीम ऍप! 

माझिया गे महाराष्ट्री 
कशापायी घाई बाये 
सह्याद्रीच्या आवारात 
घरोघरी शौचालये 

माझिया गे महाराष्ट्री 
गावे झाली डिजिटल 
फोरजीचा स्पीड बाई 
धणी डोळ्याची फिटंल 

माझिया गे महाराष्ट्री 
धावू लागे बुलेटट्रेन 
मेट्रोच्याही कामापायी 
बोगद्यांची खणाखण 

माझिया गे महाराष्ट्री 
विकासाची येई गंगा 
अलबत्या गलबत्याने 
घेऊ नये येथे पंगा! 

शेजीबाई शेजीबाई 
माझ्या मराठी भूमीत 
मित्रपक्ष करतात- 
वर्षे पंचवीस साथ! 

शेजीबाई शेजीबाई 
तूच स्वच्छतेची दूत 
कधी सांग उतरावे 
अच्छे दिनांचे हे भूत 

शेजीबाई शेजीबाई 
लढतो गा मीच शर्थी 
एकदाच म्हण गे बाई 
मीच आहे रे लाभार्थी! 

शेजीबाई शेजीबाई 
दोन टूक, एक वार 
एकदाच बोल बाई 
होय, हे माझं सरकार! 

Web Title: Dhing Tang article